विस्तृत उत्तर
माँ स्कंदमाता के शौर्य और मातृत्व का संदेश:
— एक हाथ बालक को थामे है, जो दर्शाता है कि एक माँ अपने शौर्य को भी संतति के लिए नरम बना देती है।
— फिर भी, संकट आने पर यही माता अपने सिंह पर आरूढ़ होकर दुष्टों का अंत भी करने का सामर्थ्य रखती है।
— वे अपने भक्तों के लिए सदा द्वारपाल की तरह खड़ी रहती हैं — जिस तरह माँ बालक को जरा सी आहट पर भी थाम लेती है, वैसे ही देवी संकट आने से पहले ही अपने भक्त को संभाल लेती हैं।
— उनकी कहानी से यह संदेश मिलता है कि माता का प्रेम और मार्गदर्शन संतान को संसार के सबसे बड़े संग्राम के लिए भी तैयार कर सकता है।
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