विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में भगवान की कृपा इस रूप में दिखती है कि भगवान वामन ने महाराजा बलि के पूर्ण आत्म-समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें सुतल लोक का राज्य दिया और स्वयं उनके रक्षक बन गए। भगवान ने बलि से त्रिलोकी का राज्य लिया, पर उसके बदले उन्हें ऐसा पारलौकिक लोक प्रदान किया जहाँ मृत्यु, रोग और काल का भय नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि सुतल लोक देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक समृद्ध होगा और वहाँ बलि को मानसिक या शारीरिक व्याधि नहीं होगी। साक्षात् अखिल-जगद्-गुरु भगवान नारायण अपने चतुर्भुज गदापाणि रूप में इस लोक के द्वार पर रक्षक के रूप में खड़े हैं। यह भगवान की अहैतुकी कृपा का स्पष्ट प्रमाण है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक