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विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल जय और विजय थे। वे भगवान के निकट सेवक और अत्यंत शक्तिशाली पार्षद माने जाते हैं। उनका कार्य वैकुण्ठ के द्वारों की रक्षा करना था, विशेषकर भगवान के अंतरंग क्षेत्र का प्रवेश नियंत्रित करना। लेकिन इसी सेवा में एक बार उनसे भूल हुई, जब उन्होंने सनकादिक मुनियों को रोक दिया। उसी घटना से उन्हें श्राप मिला और वे तीन जन्मों तक असुर रूप में भगवान के शत्रु बने।
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