विस्तृत उत्तर
श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार, देवी को विभिन्न द्रव्यों से स्नान कराने के विशिष्ट फल इस प्रकार हैं:
— ईख का रस (Sugarcane Juice): जो साधक सौ घड़ों ईख के रस से भगवती को स्नान कराता है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। वेद मंत्रों के साथ आम के रस या ईख के रस से स्नान कराने पर लक्ष्मी और सरस्वती उस साधक के द्वार पर चिरकाल तक निवास करती हैं।
— द्राक्षा-रस (अंगूर का रस): साधक अपने संबंधियों सहित उतने वर्षों तक 'देवी-लोक' में वास करता है, जितने परमाणु उस रस में विद्यमान होते हैं।
— सुगंधित जल (कपूर, केसर, कस्तूरी, अगरु मिश्रित): साधक सौ जन्मों के अर्जित पापों से मुक्त हो जाता है।
— दूध: साधक एक कल्प तक क्षीरसागर में निवास करता है।
— दही: साधक दधिकुण्ड का स्वामी बन जाता है।
— शहद, घी, शर्करा या सहस्र घड़े जल: इस लोक और परलोक दोनों में असीम सुख की प्राप्ति।





