देवी को पंचामृत स्नान कराने से क्या फल मिलता है?
की चेकलिस्ट
देवी स्नान के फल (देवी भागवत): ईख का रस = पुनर्जन्म से मुक्ति + लक्ष्मी-सरस्वती का वास। द्राक्षा रस = देवी-लोक में वास। सुगंधित जल = सौ जन्मों के पाप नाश। दूध = एक कल्प क्षीरसागर में निवास। शहद/घी/शर्करा = इस लोक-परलोक में असीम सुख।
- 1ईख का रस (Sugarcane Juice): जो साधक सौ घड़ों ईख के रस से भगवती को स्नान कराता है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। वेद मंत्रों के साथ आम के रस या ईख के रस से स्नान कराने पर लक्ष्मी और सरस्वती उस साधक के द्वार पर चिरकाल तक निवास करती हैं।
- 2द्राक्षा-रस (अंगूर का रस): साधक अपने संबंधियों सहित उतने वर्षों तक 'देवी-लोक' में वास करता है, जितने परमाणु उस रस में विद्यमान होते हैं।
- 3सुगंधित जल (कपूर, केसर, कस्तूरी, अगरु मिश्रित): साधक सौ जन्मों के अर्जित पापों से मुक्त हो जाता है।
- 4दूध: साधक एक कल्प तक क्षीरसागर में निवास करता है।
- 5दही: साधक दधिकुण्ड का स्वामी बन जाता है।
- 6शहद, घी, शर्करा या सहस्र घड़े जल: इस लोक और परलोक दोनों में असीम सुख की प्राप्ति।
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