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विस्तृत उत्तर
प्रकृति की साम्यावस्था वह स्थिति है जहाँ सत्त्व, रजस और तमस तीनों गुण शांत संतुलन में रहते हैं। इस अवस्था में कोई सृजन, गति, भेद या परिवर्तन सक्रिय नहीं होता। यह सृष्टि से पहले की अव्यक्त संभावना है। जब परम संकल्प से स्पंदन उठता है, तब यही संतुलन गतिशील होकर सृष्टि में बदलता है।
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