वास्तु धन नियमतिजोरी का मुख किस दिशा में खुलना चाहिए?तिजोरी का मुख (दरवाज़ा) उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) में खुलना सर्वोत्तम है। पूर्व दिशा दूसरा विकल्प है। दक्षिण में मुख कभी नहीं होना चाहिए — यह धन हानि का कारण बनता है।#तिजोरी मुख#उत्तर दिशा#कुबेर
मरणोपरांत आत्मा यात्राशवदाह के समय शव का सिर किस दिशा में रखना चाहिए?शवदाह के समय शव का सिर उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।#शवदाह#दिशा#उत्तर दिशा
पूजा विधानराज मातंगी साधना की विधि क्या है?राज मातंगी साधना: उत्तर दिशा, सफेद वस्त्र-आसन। अक्षत से 'ह्रीं' लिखकर यंत्र स्थापित करें। हृदयंगम साधना में: पीले वस्त्र + उत्तर दिशा + गुरु चित्र + हृदयंगम यंत्र + गुटिका + माला।#राज मातंगी विधि#उत्तर दिशा#सफेद वस्त्र
नियम और पात्रताहवन में किस दिशा में मुख रखें?हवन में यजमान का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।#हवन दिशा#पूर्व दिशा#उत्तर दिशा
जप का स्थान, समय, आसन और मालाजप में किस दिशा में मुख करना चाहिए?जप में मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा में होना चाहिए — पूर्व = सूर्य की दिशा (ज्ञान, प्रकाश, सकारात्मक ऊर्जा); उत्तर = कुबेर और देवताओं की दिशा।#पूर्व दिशा#उत्तर दिशा#सूर्य
साधना विधिनमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?नमः शिवाय जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।#पूर्व दिशा#उत्तर दिशा#जप दिशा
पाठ विधि और नियमचन्द्रदोष निवारण के लिए कौन सी दिशा में बैठकर पाठ करें?चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में मुख करके पाठ करें — विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में यह विशेष लाभकारी है।#चन्द्रदोष दिशा#उत्तर दिशा#वायव्य
शिव शाबर मंत्रव्यापार वृद्धि और धन लाभ के लिए किस दिशा में मुख करके जप करें?मानसिक और बैंकिंग कार्यों के लिए उत्तर दिशा, तथा भूमि और श्रम कार्यों के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।#व्यापार वृद्धि#दिशा ज्ञान#उत्तर दिशा
शिव शाबर मंत्रव्यापार और धन लाभ के लिए किस दिशा में मुख करके जप करें?धन लाभ और व्यापार में सफलता के लिए उत्तर दिशा की ओर मुख करके मंत्र जप करें।#व्यापार दिशा#धन लाभ#उत्तर दिशा
वास्तु शास्त्रउत्तर दिशा में सिर करके क्यों नहीं सोना चाहिएउत्तर में सिर करके सोना वास्तु और आयुर्वेद दोनों में वर्जित है। पृथ्वी और शरीर के चुंबकीय ध्रुवों के विकर्षण से रक्तचाप, सिरदर्द और अनिद्रा हो सकती है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसे आयु क्षीण करने वाला कहा गया है। दक्षिण या पूर्व दिशा उत्तम है।#उत्तर दिशा#शयन निषेध#वास्तु