विस्तृत उत्तर
कुबेर = धन के देवता (देवताओं के कोषाध्यक्ष)। कुबेर यंत्र = धन आकर्षण।
स्थापना
- 1धनतेरस/दीपावली/अक्षय तृतीया — सर्वोत्तम।
- 2उत्तर दिशा — कुबेर = उत्तर दिशा के अधिपति।
- 3तिजोरी/गल्ले/कार्यालय में।
- 4गंगाजल शुद्धि → पीले कपड़े → पीले पुष्प।
- 5'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः' 108 बार।
- 6या 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा'
नित्य: दीपक + धूप + 'ॐ कुबेराय नमः' 108।
फल: धन वृद्धि, आर्थिक स्थिरता, व्यापार लाभ, ऋण मुक्ति।
ध्यान रखें: कुबेर यंत्र = सहायक। मेहनत + बुद्धि + यंत्र = धन। केवल यंत्र बिना कर्म = निष्फल।





