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विस्तृत उत्तर
यक्षों के अधिपति देव कुबेर हैं। वे देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं और अलकापुरी के अधिपति हैं। यक्ष प्रकृति के रक्षक, वनों, पर्वतों, झीलों और पृथ्वी के गर्भ में छिपे खजानों के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। इसीलिए उनका संबंध धन, संपदा और प्राकृतिक खजानों से जुड़ा है। देवी रूप में इन्हें यक्षिणी कहा जाता है।
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