का सरल उत्तर
कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें, जप के बाद आसन के नीचे जल गिराकर मस्तक पर लगाएं और अंत में सारा जप ईश्वर को अर्पित कर दें ताकि ऊर्जा बिखरने न पाए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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