विस्तृत उत्तर
पूजा में बैठने का सही तरीका भगवद् गीता और पातंजल योग में वर्णित है:
भगवद् गीता (6.11-13)
तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः।
उपविश्यासने युञ्ज्याद् योगमात्मविशुद्धये।'
— आसन पर बैठकर, मन एकाग्र करके, इंद्रियों को वश में करके ध्यान करें।
बैठने के नियम
1आसन
कुश या ऊनी आसन — भूमि पर सीधे नहीं।
2शरीर की स्थिति
- ▸रीढ़ सीधी — सर्वाधिक महत्वपूर्ण
- ▸गर्दन सीधी
- ▸कंधे ढीले
- ▸हाथ गोद में या घुटनों पर
3मुख
पूर्व या उत्तर दिशा में — देवता की ओर।
4पैर
- ▸सुखासन (पालथी) — सबसे सुलभ
- ▸पद्मासन — उच्च ध्यान के लिए
- ▸वज्रासन — भोजन के बाद या यदि पैर दर्द हो
5यदि फर्श पर बैठना कठिन हो
कुर्सी पर बैठकर भी पूजा की जा सकती है। रीढ़ सीधी रखें।
6पूजा के दौरान
- ▸जल्दी न उठें
- ▸पैर सुन्न हों तो धीरे से हिलाएं
- ▸पीठ न करें देवता की ओर





