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पूजा विधि📜 भगवद् गीता (6.11-13), पातंजल योग सूत्र — आसन2 मिनट पठन

पूजा में बैठने का सही तरीका क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में बैठना: आसन पर (भूमि पर नहीं)। रीढ़ सीधी — सर्वाधिक महत्वपूर्ण। सुखासन (पालथी) सबसे सुलभ। पूर्व या उत्तर मुख। कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं — रीढ़ सीधी रखें। गीता 6.11: 'मन एकाग्र, आसन स्थिर।'

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विस्तृत उत्तर

पूजा में बैठने का सही तरीका भगवद् गीता और पातंजल योग में वर्णित है:

भगवद् गीता (6.11-13)

तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः।

उपविश्यासने युञ्ज्याद् योगमात्मविशुद्धये।'

— आसन पर बैठकर, मन एकाग्र करके, इंद्रियों को वश में करके ध्यान करें।

बैठने के नियम

1आसन

कुश या ऊनी आसन — भूमि पर सीधे नहीं।

2शरीर की स्थिति

  • रीढ़ सीधी — सर्वाधिक महत्वपूर्ण
  • गर्दन सीधी
  • कंधे ढीले
  • हाथ गोद में या घुटनों पर

3मुख

पूर्व या उत्तर दिशा में — देवता की ओर।

4पैर

  • सुखासन (पालथी) — सबसे सुलभ
  • पद्मासन — उच्च ध्यान के लिए
  • वज्रासन — भोजन के बाद या यदि पैर दर्द हो

5यदि फर्श पर बैठना कठिन हो

कुर्सी पर बैठकर भी पूजा की जा सकती है। रीढ़ सीधी रखें।

6पूजा के दौरान

  • जल्दी न उठें
  • पैर सुन्न हों तो धीरे से हिलाएं
  • पीठ न करें देवता की ओर
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शास्त्रीय स्रोत
भगवद् गीता (6.11-13), पातंजल योग सूत्र — आसन
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