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मंत्र एवं योग📜 योग शास्त्र, सूर्य उपासना परम्परा2 मिनट पठन

सूर्य नमस्कार मंत्र कौन से हैं और कैसे बोलें

संक्षिप्त उत्तर

सूर्य नमस्कार में 12 मंत्र: ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः। प्रत्येक मंत्र एक आसन के साथ। फल: आयु, प्रज्ञा, बल, तेज वृद्धि।

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विस्तृत उत्तर

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है। इसमें 12 आसन (स्थितियाँ) हैं और प्रत्येक के साथ सूर्य के एक विशिष्ट नाम का मंत्र बोला जाता है।

प्रारम्भिक प्रार्थना श्लोक

ॐ ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः।

केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशंखचक्रः॥'

12 सूर्य नमस्कार मंत्र (क्रम और आसन सहित)

  1. 1ॐ मित्राय नमः — प्रणामासन (नमस्कार मुद्रा)

अर्थ: सबके मित्र को नमस्कार

  1. 1ॐ रवये नमः — हस्तोत्तानासन (ऊर्ध्व हस्त)

अर्थ: प्रकाशमान को नमस्कार

  1. 1ॐ सूर्याय नमः — पादहस्तासन (हाथ पैर तक)

अर्थ: क्रियाओं के प्रेरक को नमस्कार

  1. 1ॐ भानवे नमः — अश्वसंचालनासन

अर्थ: प्रभा बिखेरने वाले को नमस्कार

  1. 1ॐ खगाय नमः — दण्डासन/पर्वतासन

अर्थ: आकाश में गमन करने वाले को नमस्कार

  1. 1ॐ पूष्णे नमः — अष्टांग नमस्कार

अर्थ: पोषण करने वाले को नमस्कार

  1. 1ॐ हिरण्यगर्भाय नमः — भुजंगासन

अर्थ: स्वर्ण गर्भ वाले (सृष्टिकर्ता) को नमस्कार

  1. 1ॐ मरीचये नमः — पर्वतासन (दोहराव)

अर्थ: किरणों वाले को नमस्कार

  1. 1ॐ आदित्याय नमः — अश्वसंचालनासन (विपरीत)

अर्थ: अदिति-पुत्र को नमस्कार

  1. 1ॐ सवित्रे नमः — पादहस्तासन (दोहराव)

अर्थ: जीवन देने वाले को नमस्कार

  1. 1ॐ अर्काय नमः — हस्तोत्तानासन (दोहराव)

अर्थ: प्रशंसनीय को नमस्कार

  1. 1ॐ भास्कराय नमः — प्रणामासन (दोहराव)

अर्थ: ज्ञान और प्रकाश देने वाले को नमस्कार

फलश्रुति श्लोक

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥'

अर्थ: जो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

कैसे बोलें

  • प्रत्येक आसन में प्रवेश करते समय सम्बन्धित मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें।
  • श्वास-प्रश्वास पर ध्यान रखें — मंत्र और श्वास को समन्वित करें।
  • प्रातःकाल खुले और शान्त स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके करें।
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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, सूर्य उपासना परम्परा
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