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विस्तृत उत्तर
चन्द्रशेखराष्टकम् की रचना उसी क्षण, मृत्यु के मुख से मुक्ति प्राप्त करने के बाद, परम कृतज्ञता और शिव के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव से की गई थी।
इसलिए, यह स्तोत्र न केवल शिव का गुणगान है, बल्कि यह मृत्यु पर विजय (मृत्युंजयत्व) और भयहीनता (अभय) की घोषणा भी है।
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