विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय की अनन्य भक्ति और उनकी स्तुति सुनकर भगवान शिव तुरंत प्रकट हुए। उन्होंने यमराज को पराजित किया और अपने परम भक्त मार्कण्डेय को मृत्यु के भय से मुक्त कर दीर्घायु (चिरंजीवी) होने का वरदान दिया।
शिव ने मार्कण्डेय को क्या वरदान दिया को संदर्भ सहित समझें
शिव ने मार्कण्डेय को क्या वरदान दिया का सबसे सीधा सार यह है: शिव ने मार्कण्डेय को यमराज को पराजित करके मृत्यु के भय से मुक्ति और दीर्घायु (चिरंजीवी) होने का वरदान दिया।
स्तोत्र के रचयिता और उत्पत्ति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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चन्द्रशेखराष्टकम् से दीर्घायु मिलती है क्या?
हाँ — फलश्रुति में 'पूर्णमायुर्' (पूर्ण आयु) का स्पष्ट वचन है। मार्कण्डेय को शिव ने चिरंजीवी बनाया — यह स्तोत्र आत्मिक बल और पूर्ण आयु प्रदान करता है।
अश्वत्थामा शिव के किस अवतार का अंश है
अश्वत्थामा शिव के 'सवन्तिक रुद्र' अंशावतार हैं। द्रोणाचार्य की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने सवन्तिक रुद्र के अंश से उनके पुत्र रूप में जन्म लिया। जन्म से मस्तक में दिव्य मणि थी जो उन्हें अजेय बनाती थी।
महामृत्युंजय मंत्र और मार्कण्डेय ऋषि की कथा क्या है?
मार्कण्डेय ऋषि ने महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप किया → यमराज को परास्त किया → शिव ने शिवलिंग से प्रकट होकर 'चिरंजीवी' होने का वरदान दिया।
महामृत्युंजय मंत्र को 'मार्कण्डेय मंत्र' क्यों कहते हैं?
मार्कण्डेय ने १६ वर्ष की अल्पायु में शिवलिंग के समक्ष इस मंत्र का जप किया — उनके जप की ऊर्जा और शिव कृपा ने यमराज को पराजित किया और मार्कण्डेय चिरंजीवी हुए। इसीलिए यह 'मार्कण्डेय मंत्र' भी कहलाता है।
अश्वत्थामा अमर हैं क्या और आज कहाँ
अश्वत्थामा चिरंजीवी हैं — परंतु शाप से, वरदान से नहीं। सोते पांचालों की हत्या और गर्भस्थ परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र के दंडस्वरूप कृष्ण ने मणि छीनी और शाप दिया — रोग, दुर्गंध, एकाकीपन में अनंत काल तक भटकना। 'आज कहाँ' — लोक मान्यता; शास्त्रीय रूप से अनिश्चित।
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