विस्तृत उत्तर
हाँ। फलश्रुति (श्लोक 10) स्पष्ट रूप से 'पूर्णमायुर्' (पूर्ण आयु) का वचन देती है।
यह आश्वासन मार्कण्डेय ऋषि के जीवन से सीधा जुड़ा हुआ है। इस स्तोत्र का पाठ उस भय को शिव की शरण में बदलकर आत्मिक बल और पूर्ण आयु प्रदान करता है।
चन्द्रशेखर स्वयं उसे पूर्ण आयु, निरोगी जीवन, सम्पूर्ण धन-संपदा देते हैं और बिना किसी विशेष प्रयास के अंत में मुक्ति प्रदान करते हैं।





