विस्तृत उत्तर
प्रामाणिक ग्रंथों में महाकाल ककारादि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है:
...वांछितं समवाप्नोति, नात्र कार्या विचारणा।
अर्थ: वह अपने सभी वांछित फलों को प्राप्त करता है, इसमें कोई संदेह या विचार नहीं करना चाहिए।
'वांछितं समवाप्नोति, नात्र कार्या विचारणा' का अर्थ है: साधक अपने सभी वांछित फल प्राप्त करता है — इसमें कोई संदेह नहीं करना चाहिए।
प्रामाणिक ग्रंथों में महाकाल ककारादि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है:
...वांछितं समवाप्नोति, नात्र कार्या विचारणा।
अर्थ: वह अपने सभी वांछित फलों को प्राप्त करता है, इसमें कोई संदेह या विचार नहीं करना चाहिए।
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