विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में दीर्घायु और कायाकल्प प्राप्ति के लिए अनेक साधनाएँ बताई गई हैं।
1महामृत्युंजय साधना (सर्वप्रमुख)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।'
- ▸ऋग्वेद का यह मंत्र 'मृत्यु को जीतने वाला' माना गया है
- ▸सवा लाख (1,25,000) जप = सिद्धि
- ▸नित्य 108 बार जप = दीर्घायु और रोग-निवारण
- ▸दशांश हवन (12,500 आहुतियाँ) करने से प्रभाव बहुगुणित
2अमृत संजीवनी साधना
- ▸शिव उपासना — शिवलिंग पर नित्य रुद्राभिषेक
- ▸बिल्व पत्र अर्पण
- ▸सोमवार व्रत
3रसायन साधना (तंत्र + आयुर्वेद)
रसार्णव और चरक संहिता दोनों में 'रसायन' (Rejuvenation) विधि:
- ▸पारद सेवन (अष्टसंस्कारित — केवल योग्य वैद्य के निर्देश में)
- ▸आमलकी (आँवला) रसायन — मंत्र-सिद्ध
- ▸अश्वगन्धा + स्वर्ण भस्म + शिलाजीत — मंत्रों से अभिमंत्रित
4सूर्य उपासना
- ▸नित्य प्रातः सूर्य नमस्कार
- ▸आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
- ▸सूर्य के गायत्री मंत्र का 108 बार जप
- ▸सूर्य = प्राण शक्ति का स्रोत — दीर्घायु का प्रत्यक्ष दाता
5कुंडलिनी योग (तांत्रिक)
तंत्रालोक: कुंडलिनी जागरण = शरीर की प्रत्येक कोशिका का नवीनीकरण। जिस साधक की कुंडलिनी जागृत होती है, उसका शरीर दीर्घकाल तक युवा और ऊर्जावान रहता है।
6प्राणायाम (तांत्रिक प्राणायाम)
- ▸कुम्भक प्राणायाम — श्वास को रोकने का अभ्यास
- ▸तंत्र में कहा गया: 'जितने श्वास बचाए — उतना जीवन बढ़ा'
7मृतसंजीवनी मंत्र
शिव का गोपनीय मंत्र — केवल गुरु-दीक्षा से प्राप्त। अकाल मृत्यु भय में प्रयुक्त।
सहायक उपाय
- ▸नीलम या गोमेद रत्न (ज्योतिष अनुसार)
- ▸पंचमुखी रुद्राक्ष धारण
- ▸नियमित सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, और नियमित दिनचर्या
तंत्र का दृष्टिकोण
कुलार्णव तंत्र: दीर्घायु अपने आप में लक्ष्य नहीं — साधना के लिए पर्याप्त समय मिले, इसलिए दीर्घायु की कामना उचित है। बिना साधना के दीर्घायु = व्यर्थ।
