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मंदिर📜 आगम शास्त्र, स्कंद पुराण, शिव पुराण, नाद बिंदु उपनिषद2 मिनट पठन

मंदिर में घंटी क्यों बजाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

घंटी क्यों: आगम शास्त्र — देवता को उपस्थिति की सूचना। स्कंद पुराण: 'घंटाध्वनिः सर्वपापनाशिनी।' नाद बिंदु उपनिषद: नाद-ब्रह्म = नकारात्मक ऊर्जा नाश। मन-एकाग्रता (सांसारिक विचार रुकते हैं)। काँसे की ध्वनि = वायु-शुद्धि। अशुभ-निवारण। धीरे तीन बार बजाएँ।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में घंटी बजाने के पीछे वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और शास्त्रीय तीनों आधार हैं।

शास्त्रीय आधार

आगम शास्त्र: 'घंटानादेन देवेशं बोधयेत्।' — घंटी की ध्वनि से देवता को जागृत (सचेत) किया जाता है। मंदिर-प्रवेश पर घंटी बजाना = देवता को अपनी उपस्थिति की सूचना देना।

स्कंद पुराण: 'घंटाध्वनिः सर्वपापनाशिनी।' — घंटी की ध्वनि सभी पापों को नष्ट करती है।

घंटी बजाने के पाँच कारण

1देवता को सूचना

जैसे किसी के घर में प्रवेश से पहले दरवाज़ा खटखटाते हैं — वैसे ही घंटी = देवता को उपस्थिति की सूचना।

2नाद-शुद्धि

नाद बिंदु उपनिषद: घंटी की ध्वनि = नाद-ब्रह्म का प्रकट रूप। यह ध्वनि वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।

3मन-एकाग्रता

घंटी बजाने के बाद उसकी गूँज सुनने पर मन तुरंत वर्तमान में आता है — सांसारिक विचार क्षणभर के लिए रुक जाते हैं।

4वायु-शुद्धि

शिव पुराण: घंटी की विशेष धातु (काँसे) की ध्वनि-तरंगें (frequencies) वातावरण के हानिकारक सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।

5अशुभ-निवारण

आगम शास्त्र: घंटी की ध्वनि से अशुभ शक्तियाँ मंदिर से दूर रहती हैं।

घंटी बजाने की विधि

एक बार जोरदार नहीं — धीरे-धीरे, तीन बार या ताल के साथ बजाएँ। आरती के समय ताल-सहित बजाना उचित है।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र, स्कंद पुराण, शिव पुराण, नाद बिंदु उपनिषद
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