विस्तृत उत्तर
मंदिर में शंख-ध्वनि का महत्त्व विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है।
शास्त्रीय आधार
विष्णु पुराण: 'शंखध्वनेः अशुभनाशनम्।' — शंख की ध्वनि से सभी अशुभ नष्ट होते हैं। शंख = विष्णु का एक आयुध (चतुर्भुज में)। इसकी ध्वनि = विष्णु-उपस्थिति का संकेत।
स्कंद पुराण: 'यत्र शंखो ध्वन्यते तत्र लक्ष्मीः निवसति।' — जहाँ शंख बजता है, वहाँ लक्ष्मी निवास करती हैं।
शंख बजाने के पाँच कारण
1देवता को जागृत करना
आगम शास्त्र: पूजारंभ में शंख = देवता को 'पूजा प्रारंभ हो रही है' की सूचना।
2नाद-ब्रह्म
नाद बिंदु उपनिषद: शंख की ध्वनि-तरंगें = 'ॐ' के समान। यह ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है और वातावरण को शुद्ध करती है।
3वैज्ञानिक दृष्टि
शंख की ध्वनि-आवृत्ति (frequency) विशेष रूप से वातावरण के सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करती है — यह वैज्ञानिक अध्ययन से भी समर्थित है।
4सात्विक ऊर्जा का संचार
भागवत पुराण: शंख = पवित्र वस्तु। इससे नित्य जल का सेवन — रोगनाशक। शंख की ध्वनि = सात्विक ऊर्जा।
5दिव्य काल-सूचना
मंदिर में शंख-ध्वनि = पूजा की समय-सूचना। दूर तक सुनाई देती है — सभी भक्त उपस्थित हों।





