विस्तृत उत्तर
वैष्णव और शैव मंदिरों की पूजा पद्धतियों में अनेक मूलभूत अंतर हैं जो उनके दर्शन, आगम, और परम्परा से उत्पन्न होते हैं।
1मूल देवता और दर्शन
| विषय | वैष्णव | शैव |
|---|---|---|
| प्रमुख देवता | विष्णु/कृष्ण/राम | शिव/रुद्र |
| शक्ति | लक्ष्मी | पार्वती/शक्ति |
| दर्शन | विशिष्टाद्वैत/द्वैत | शैव सिद्धान्त/अद्वैत |
2मूर्ति/प्रतीक
- ▸वैष्णव: विग्रह (मूर्ति) — शालग्राम शिला भी पूजनीय
- ▸शैव: शिवलिंग (अमूर्त प्रतीक) — मूर्ति भी, परंतु लिंग प्रधान
3अभिषेक
- ▸वैष्णव: अभिषेक जल/पंचामृत से। तुलसी जल विशेष। अभिषेक के बाद मूर्ति को वस्त्र-आभूषण से सजाते हैं
- ▸शैव: शिवलिंग पर निरंतर जलधारा (अभिषेक प्रधान)। बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, आंकड़ा अर्पित
4पुष्प और अर्पण
- ▸वैष्णव: तुलसी (सर्वोत्तम), कमल, पद्म, गुलाब। तुलसी बिना विष्णु पूजा अपूर्ण
- ▸शैव: बिल्वपत्र (सर्वोत्तम), धतूरा, आक, शमी। बिल्वपत्र बिना शिव पूजा अपूर्ण
- ▸विशेष: तुलसी शिवलिंग पर वर्जित (कुछ परम्पराओं में)। केतकी भी शिव पर वर्जित
5तिलक
- ▸वैष्णव: ऊर्ध्वपुण्ड्र (चंदन — U/Y आकार)
- ▸शैव: त्रिपुण्ड्र (विभूति — तीन आड़ी रेखाएँ)
6भोग (नैवेद्य)
- ▸वैष्णव: सात्विक — मिठाई, फल, दूध, पंचामृत। प्याज-लहसुन-मांस पूर्णतः वर्जित
- ▸शैव: सात्विक + कुछ विशिष्ट — शिव को धतूरा, भांग, बेर, कच्चा दूध। वामाचारी शैव में पंचमकार
7मंत्र
- ▸वैष्णव: 'ॐ नमो नारायणाय', 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', विष्णु सहस्रनाम
- ▸शैव: 'ॐ नमः शिवाय', रुद्राष्टाध्यायी, शिव पंचाक्षर
8आरती/दीप
- ▸वैष्णव: पंचारति (पाँच दीप), कर्पूर आरती, तुलसी दीप
- ▸शैव: कर्पूर आरती प्रधान, एकार्ति (एक दीप) भी प्रचलित
9परिक्रमा
- ▸वैष्णव: पूर्ण परिक्रमा
- ▸शैव: शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा (जल निकास — सोमसूत्र — को पार नहीं करते)
10आगम ग्रंथ
- ▸वैष्णव: वैखानस आगम, पाञ्चरात्र आगम
- ▸शैव: शैव आगम (28 — कामिक प्रमुख), शैव सिद्धान्त
समन्वय
हरिहर (शिव-विष्णु एकता), शंकराचार्य का स्मार्त सम्प्रदाय — दोनों की पूजा एक साथ। अंततः दोनों एक ही परब्रह्म के रूप हैं।





