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मंदिर📜 आगम शास्त्र, मनुस्मृति, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

मंदिर में प्रवेश करने से पहले क्या करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

मंदिर-प्रवेश से पूर्व: स्नान (अनिवार्य) → स्वच्छ वस्त्र → जूते उतारें → आचमन (तीन बार जल) → मस्तक पर तिलक → मन में भगवान का स्मरण। निषेध: सूतक, पातक, रजस्वला-काल। मनुस्मृति: शालीन वस्त्र। विष्णु पुराण: सांसारिक विचार छोड़कर प्रवेश।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर-प्रवेश से पूर्व की शुद्धि और मनःस्थिति का विधान आगम शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है।

मंदिर-प्रवेश से पूर्व करने योग्य कार्य

1शारीरिक शुद्धि

  • स्नान — आगम शास्त्र: स्नान किए बिना मंदिर न जाएँ। असमर्थ हों तो कम-से-कम हाथ-मुँह धोएँ।
  • स्वच्छ वस्त्र — मनुस्मृति: मंदिर में स्वच्छ और शालीन वस्त्र आवश्यक।

2जूते-चप्पल उतारना

मंदिर के द्वार पर या निर्धारित स्थान पर। यह अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।

3आचमन

हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन ('ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ गोविंदाय नमः') — मन और वाणी की शुद्धि।

4तिलक

मस्तक पर चंदन, भस्म या कुमकुम का तिलक — आगम शास्त्र: तिलक = देवता की उपस्थिति का स्वागत।

5मनोशुद्धि

विष्णु पुराण: मंदिर में प्रवेश करते समय मन में सांसारिक विचार न रखें। भगवान का नाम-स्मरण करते हुए प्रवेश करें।

6निषेध-स्थितियाँ (कब न जाएँ)

  • सूतक (घर में जन्म के 10-40 दिन) या पातक (मृत्यु अशौच) में मंदिर न जाएँ
  • महिलाएँ रजस्वला-अवस्था में मंदिर न जाएँ (परंपरागत नियम)
  • पूर्ण नशे की अवस्था में वर्जित

7संकल्प

मन में संकल्प करें: 'मैं भगवान के दर्शन के लिए जा रहा/रही हूँ।' — यह मन को तैयार करता है।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र, मनुस्मृति, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु
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