विस्तृत उत्तर
मंदिर-प्रवेश से पूर्व की शुद्धि और मनःस्थिति का विधान आगम शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है।
मंदिर-प्रवेश से पूर्व करने योग्य कार्य
1शारीरिक शुद्धि
- ▸स्नान — आगम शास्त्र: स्नान किए बिना मंदिर न जाएँ। असमर्थ हों तो कम-से-कम हाथ-मुँह धोएँ।
- ▸स्वच्छ वस्त्र — मनुस्मृति: मंदिर में स्वच्छ और शालीन वस्त्र आवश्यक।
2जूते-चप्पल उतारना
मंदिर के द्वार पर या निर्धारित स्थान पर। यह अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।
3आचमन
हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन ('ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ गोविंदाय नमः') — मन और वाणी की शुद्धि।
4तिलक
मस्तक पर चंदन, भस्म या कुमकुम का तिलक — आगम शास्त्र: तिलक = देवता की उपस्थिति का स्वागत।
5मनोशुद्धि
विष्णु पुराण: मंदिर में प्रवेश करते समय मन में सांसारिक विचार न रखें। भगवान का नाम-स्मरण करते हुए प्रवेश करें।
6निषेध-स्थितियाँ (कब न जाएँ)
- ▸सूतक (घर में जन्म के 10-40 दिन) या पातक (मृत्यु अशौच) में मंदिर न जाएँ
- ▸महिलाएँ रजस्वला-अवस्था में मंदिर न जाएँ (परंपरागत नियम)
- ▸पूर्ण नशे की अवस्था में वर्जित
7संकल्प
मन में संकल्प करें: 'मैं भगवान के दर्शन के लिए जा रहा/रही हूँ।' — यह मन को तैयार करता है।





