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विस्तृत उत्तर
योग करते समय संशय तब होता है जब साधक की बुद्धि अनिश्चित हो जाती है। पाठ में 'यह करूँ अथवा वह करूँ' इन दोनों स्थितियों से मिश्रित अनिश्चित विज्ञान को स्थानसंशय कहा गया है। यह योग-साधना की बाधाओं में से एक है। जब निर्णय स्थिर नहीं रहता, अभ्यास की दिशा स्पष्ट नहीं होती और मन द्वंद्व में रहता है, तब साधना की गति रुकती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 5
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