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चित्त — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

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ध्यान

ध्यान करने से आत्मिक शांति कैसे मिलती है?

ध्यान से शांति: पतञ्जलि — चित्त-वृत्ति-निरोध → द्रष्टा स्वरूप में स्थित। गीता (6.15): नित्य ध्यानी को 'निर्वाण-परम शांति'। क्रम: ध्यान → विचार मंद → प्रतिक्रिया कम → अहंकार शमन → आत्म-बोध → शांति।

आत्मिक शांतिध्यानचित्त
ध्यान साधना

ध्यान के दौरान शरीर को स्थिर क्यों रखना चाहिए?

शरीर स्थिर रखने से प्राण स्थिर होता है और प्राण स्थिर होने से मन स्थिर होता है। गीता (6/13-14) — शरीर, सिर, गर्दन अचल रखें। योगसूत्र (2/47-48) — आसन सिद्ध होने पर द्वंद्व नहीं सताते। गहरे ध्यान में शरीर-बोध क्षीण होकर केवल शुद्ध चेतना शेष रहती है।

ध्यानशरीर-स्थिरताआसन
ध्यान साधना

ध्यान से मन शांत कैसे होता है?

ध्यान से मन शांत होता है क्योंकि — 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (योगसूत्र 1/2) — मन की वृत्तियाँ एकाग्रता से शांत होती हैं। श्वास धीमी होने से मन स्वतः शांत होता है। साक्षी-भाव से विचारों को देखने पर वे अपने आप विदा होते हैं। गीता (6/27) — शांत मन वाले योगी को उत्तम सुख मिलता है।

ध्यानमनशांति
योग दर्शन

ध्यान क्या है?

पतंजलि के अनुसार 'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्' — धारणा के स्थान पर चित्त का निरंतर एकाग्र प्रवाह ध्यान है। यह अष्टांग योग का सातवाँ अंग है जिसमें मन किसी एक विषय पर बिना बाधा के केंद्रित रहता है।

ध्यानमेडिटेशनएकाग्रता

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।