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विस्तृत उत्तर
प्रमाद योग में बाधा इसलिए बनता है क्योंकि यह साधना के आवश्यक साधनों की उपेक्षा है। पाठ में समाधिके साधनों का अनुष्ठान न करना प्रमाद कहा गया है। जब साधक योग के अंगों और समाधि के उपायों को ठीक से नहीं करता, तब उसकी साधना आगे नहीं बढ़ती। इसलिए प्रमाद केवल सामान्य भूल नहीं, बल्कि योग-साधन के प्रति असावधानी और अनुष्ठानहीनता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 3-4
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