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विस्तृत उत्तर
योग में आलस्य शरीर और चित्त के भारीपन से आता है। पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि शरीर तथा चित्त के भारीपन के कारण योग में प्रवृत्त न होना ही आलस्य है। यह योगाभ्यास में आने वाले आरम्भिक विघ्नों में गिना गया है। जब साधक अभ्यास की ओर नहीं बढ़ पाता और शरीर-चित्त बोझिल हो जाते हैं, तब यह अवस्था आलस्य के रूप में योगमार्ग को रोकती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 1-4
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