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विस्तृत उत्तर
यह अवस्था तब उत्पन्न होती है जब नवम भाव का स्वामी दशम भाव में विराजमान हो जाए और दशम भाव का स्वामी नवम भाव में स्थित हो। इसे 'महायोग' माना जाता है। इस अवस्था में कर्म और भाग्य एक-दूसरे के पूरक बन जाते हैं और दोनों ग्रह एक-दूसरे के कार्यकत्वों को असीमित बल प्रदान करते हैं।
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