विस्तृत उत्तर
ये दोनों एकदम विपरीत योग हैं। 'कहल योग' (Kahala) चतुर्थ और नवम भाव के स्वामियों के संबंध से बनता है और व्यक्ति को स्थिर संपत्ति, नेतृत्व और समाज में सम्मान दिलाता है। जबकि 'खल योग' (Khala) तृतीय भाव के स्वामी (3rd Lord) के किसी अन्य शुभ भाव के स्वामी के साथ स्थान परिवर्तन से बनता है। खल योग में जातक का जीवन पेंडुलम की तरह अस्थिर होता है; वह कभी अपार अमीर होता है तो कभी अत्यंत दरिद्र।





