विस्तृत उत्तर
यह मंत्र अत्यंत ऊर्जावान है। कुछ साधकों के अनुभव और शास्त्रीय मत के अनुसार, इसके नियमित जप से शरीर में तीव्र ऊष्मा (गर्मी) उत्पन्न हो सकती है।
इसलिए, यह अनुशंसा की जाती है कि इस मंत्र की साधना करने वाले साधक को पर्याप्त मात्रा में जल, दूध और अन्य शीतल (स्निग्ध) पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए।




