विस्तृत उत्तर
इस साधना को गलत कामना, अनैतिक उद्देश्य, या तामसिक प्रवृत्ति से करना पूर्णतः वर्जित है। यदि अयोग्य साधक इस तीव्र शक्ति को जागृत करता है, तो वह आत्म-विनाश का कारण बन सकती है।
गलत उद्देश्यों या अयोग्यता के साथ साधना करने पर यह आत्म-विनाशकारी हो सकती है।
इस साधना को गलत कामना, अनैतिक उद्देश्य, या तामसिक प्रवृत्ति से करना पूर्णतः वर्जित है। यदि अयोग्य साधक इस तीव्र शक्ति को जागृत करता है, तो वह आत्म-विनाश का कारण बन सकती है।
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