विस्तृत उत्तर
इसका उच्चतम फल साधक को माया के पाश से मुक्त कर शिवत्व (ईश्वर तत्त्व) के निकट ले जाना है। यह समाधि और आत्मज्ञान में आने वाले सूक्ष्म बंधनों को खंडित करने की शक्ति देती है।
इसका सर्वोच्च फल माया के बंधनों से मुक्ति और शिवत्व की प्राप्ति है।
इसका उच्चतम फल साधक को माया के पाश से मुक्त कर शिवत्व (ईश्वर तत्त्व) के निकट ले जाना है। यह समाधि और आत्मज्ञान में आने वाले सूक्ष्म बंधनों को खंडित करने की शक्ति देती है।
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