विस्तृत उत्तर
दशांश कर्म (हवन, तर्पण, मार्जन) सिद्ध मंत्र की ऊर्जा को स्थिर और उपयोग योग्य बनाने के लिए किए जाते हैं। इनके बिना मंत्र सिद्धि पूर्ण नहीं मानी जाती।
मंत्र की ऊर्जा को स्थिर और सिद्ध करने के लिए दशांश कर्म अनिवार्य हैं।
दशांश कर्म (हवन, तर्पण, मार्जन) सिद्ध मंत्र की ऊर्जा को स्थिर और उपयोग योग्य बनाने के लिए किए जाते हैं। इनके बिना मंत्र सिद्धि पूर्ण नहीं मानी जाती।
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