विस्तृत उत्तर
जप के साथ साधक को हृदय कमल में भगवान शिव (पशुपतिनाथ) के तेजोमय रूप का ध्यान करना चाहिए और यह भावना करनी चाहिए कि वे समस्त विघ्नों और अज्ञान का नाश कर रहे हैं।
हृदय में भगवान शिव के तेजोमय रूप का ध्यान करते हुए जप करना चाहिए।
जप के साथ साधक को हृदय कमल में भगवान शिव (पशुपतिनाथ) के तेजोमय रूप का ध्यान करना चाहिए और यह भावना करनी चाहिए कि वे समस्त विघ्नों और अज्ञान का नाश कर रहे हैं।
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