का सरल उत्तर
इसका सर्वोच्च फल माया के बंधनों से मुक्ति और शिवत्व की प्राप्ति है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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