विस्तृत उत्तर
तंत्र के नाम पर ठगी भारतीय समाज में एक गम्भीर समस्या है। अनेक तथाकथित तांत्रिक भोले-भाले लोगों को भय दिखाकर, चमत्कार का वादा करके ठगते हैं।
ठगी के सामान्य तरीके
1भय उत्पन्न करना
आप पर भारी टोटका है', 'आपकी कुंडली में मृत्यु योग है', 'आपके घर में भूत-प्रेत हैं' — ऐसी बातें कहकर डराना।
2अत्यधिक धन की माँग
विशेष पूजा' के नाम पर लाखों रुपये माँगना। महँगे रत्न, यंत्र, ताबीज बेचना।
3चमत्कार का प्रदर्शन
जादू की तरकीबों को 'सिद्धि' बताना। नींबू-मिर्ची, कपड़े से ताबीज निकालना आदि।
4व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग
सोशल मीडिया या अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर 'अंतर्ज्ञान' का नाटक करना।
5अनैतिक माँगें
स्त्रियों से अकेले में मिलने, वस्त्र उतारने, या अन्य अनैतिक कृत्यों की माँग।
बचाव के उपाय
6शास्त्रीय ज्ञान अर्जित करें
तंत्र के मूल सिद्धांतों को समझें। कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र जैसे प्रामाणिक ग्रंथों को पढ़ें। ज्ञान ही सबसे बड़ी रक्षा है।
7गुरु-परम्परा जाँचें
किसी भी तांत्रिक से उसकी गुरु-परम्परा पूछें। प्रमाणित सम्प्रदाय से जुड़ा हो — नाथ, शाक्त, शैव, श्रीविद्या आदि।
8धन की माँग पर सावधान
सच्चा गुरु कभी अत्यधिक धन की माँग नहीं करता। महानिर्वाण तंत्र: 'गुरु-दक्षिणा श्रद्धानुसार — बलपूर्वक नहीं।'
9चमत्कार से सावधान
कुलार्णव तंत्र: 'सिद्ध साधक सिद्धि का प्रदर्शन नहीं करता।' जो चमत्कार दिखाता है — वह सिद्ध नहीं, जादूगर है।
10भय से मुक्त रहें
तंत्र का मूल सिद्धांत = निर्भयता। जो भय दिखाकर साधना करवाए — वह तंत्र-विरोधी है।
11अकेले में न जाएँ
किसी तांत्रिक के पास विश्वसनीय व्यक्ति के साथ जाएँ। अकेलेपन का लाभ ठग उठाते हैं।
12कानूनी कार्रवाई
यदि ठगी का शिकार हों, तो पुलिस में शिकायत करें। भारतीय दंड संहिता में धोखाधड़ी और अंधविश्वास फैलाने के विरुद्ध प्रावधान हैं।
शास्त्रीय दृष्टिकोण
कुलार्णव तंत्र: 'अनेक गुरु हैं जो शिष्य का धन हरते हैं, परंतु दुर्लभ हैं वे जो शिष्य का दुःख हरें।' — अतः विवेकपूर्ण चयन अनिवार्य है।