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देवी साधना📜 तंत्र शास्त्र, शाक्त आगम, दक्षिण भारत परंपरा1 मिनट पठन

प्रत्यंगिरा देवी मंत्र का जप कैसे और कब करें?

संक्षिप्त उत्तर

प्रत्यंगिरा = नकारात्मकता वापस भेजने वाली। गुरु दीक्षा अनिवार्य। बिना दीक्षा: 'ॐ प्रत्यंगिरायै नमः' 108, शनिवार। कब: शत्रु/अभिचार/न्यायालय। दक्षिण भारत प्रचलित। 'अंतिम उपाय' — पहले हनुमान चालीसा/दुर्गा कवच।

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विस्तृत उत्तर

प्रत्यंगिरा देवी अत्यंत उग्र सुरक्षा देवी हैं — 'प्रति' = वापस, 'अंगिरा' = आक्रमण। अर्थात जो नकारात्मकता/अभिचार को वापस भेजने वाली।

महत्वपूर्ण: प्रत्यंगिरा = अत्यंत उग्र देवी — गुरु दीक्षा अनिवार्य। बिना दीक्षा विशेष मंत्र जप अनुशंसित नहीं।

सामान्य भक्ति (बिना दीक्षा)

  • 'ॐ प्रत्यंगिरायै नमः' — 108 बार, शनिवार/अमावस्या।
  • प्रत्यंगिरा स्तोत्र/कवच पाठ — सुरक्षित।

कब: शत्रु बाधा, अभिचार/काला जादू आशंका, न्यायालय विवाद, गंभीर नकारात्मकता।

दक्षिण भारत (तमिलनाडु) में प्रत्यंगिरा मंदिर और पूजा विशेष प्रचलित।

ध्यान रखें: प्रत्यंगिरा = 'अंतिम उपाय' देवी। सामान्य: हनुमान चालीसा, दुर्गा कवच पहले प्रयोग करें। प्रत्यंगिरा = जब सब असफल।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, शाक्त आगम, दक्षिण भारत परंपरा
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