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विस्तृत उत्तर
अघोरास्त्र स्तोत्र का पाठ शुरू करने से पहले साधक को अपनी शुद्धि और संकल्प के लिए विनियोग और न्यास करना अनिवार्य है, अन्यथा मंत्र की उग्र ऊर्जा को धारण करना कठिन हो सकता है।
न्यास विनियोग के बाद किया जाता है। इसमें ऋषि, छंद, देवता, बीज, शक्ति और विनियोग को शरीर के विभिन्न अंगों — सिर, मुख, हृदय, गुह्य भाग, नाभि और संपूर्ण शरीर — पर स्थापित किया जाता है।
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