विस्तृत उत्तर
अघोरास्त्र स्तोत्र एक तांत्रिक मंत्र-समूह है। इसका पाठ शुरू करने से पहले साधक को अपनी शुद्धि और संकल्प के लिए विनियोग और न्यास करना अनिवार्य है, अन्यथा मंत्र की उग्र ऊर्जा को धारण करना कठिन हो सकता है।
विनियोग जप से पूर्व जल लेकर पाठ किया जाता है। इसमें स्तोत्र के ऋषि (ब्रह्मा), छंद (अनुष्टुप), देवता (श्री नीलकंठ सदाशिव), बीज (ब्रह्म बीज) और शक्ति (पार्वती) का उल्लेख करते हुए, समस्त पाप क्षय, आरोग्य और मोक्ष प्राप्ति का संकल्प लिया जाता है।





