विस्तृत उत्तर
आग्नेयास्त्र, जो अग्नि तत्व का प्रतीक है, का प्रतिकार प्रायः जल तत्व से जुड़े वरुणास्त्र या पर्जन्यास्त्र से किया जाता था। जब कोई योद्धा आग्नेयास्त्र का संधान करता था तो विरोधी पक्ष का कुशल योद्धा तुरंत वरुणास्त्र या पर्जन्यास्त्र का आवाहन कर जल की वर्षा उत्पन्न करता था जिससे आग्नेयास्त्र की अग्नि शांत हो जाती थी या उसका प्रभाव कम हो जाता था। महाभारत में इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं जैसे जब द्रोणाचार्य ने सात्यकि पर आग्नेयास्त्र चलाया तो सात्यकि ने वरुणास्त्र से उसका सामना किया और जब भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया तो परशुराम ने वरुणास्त्र से उसे शांत किया।
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