विस्तृत उत्तर
मंत्र को पूर्णतः सिद्ध करने के लिए 108 पाठ करने का विधान भी शास्त्रों में मिलता है।
इसके अलावा, फलश्रुति में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि स्तोत्र का पाठ सप्तवारं पठेत् स्तोत्रम् (एक बार में सात बार) करना चाहिए।
यदि यह साधना किसी असाध्य बीमारी या बड़े संकट के निवारण के लिए की जा रही है, तो श्रद्धापूर्वक संकल्प लेना आवश्यक है।


