विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में सिद्धि का मार्ग महानिर्वाण तंत्र और कुलार्णव तंत्र में वर्णित है:
सिद्धि का अर्थ
तंत्र में 'सिद्धि' का अर्थ है — मंत्र का पूर्ण जागृत होना; साधक को देवी/देव की प्रत्यक्ष कृपा का अनुभव।
सिद्धि के पाँच अंग (कुलार्णव तंत्र)
- 1गुरु कृपा — बिना गुरु कृपा सिद्धि असंभव
- 2देव कृपा — इष्ट देवता की प्रसन्नता
- 3पुरश्चरण — निर्धारित जप संख्या पूर्ण करना
- 4श्रद्धा — अटूट विश्वास
- 5नित्यता — नियमित, बिना नागे साधना
सिद्धि का क्रम
चरण 1 — मंत्र स्थापना (1-40 दिन)
नित्य 108 जप से मंत्र साधक के मन में स्थापित होता है।
चरण 2 — मंत्र जागृति (40-108 दिन)
मंत्र स्वतः मन में चलने लगता है — 'अजपा जप'।
चरण 3 — मंत्र सिद्धि (पुरश्चरण पूर्ण)
पुरश्चरण के बाद — देवी/देव दर्शन, स्वप्न में संकेत, साधना में असाधारण शांति।
सिद्धि के संकेत
- 1जप में गहरी शांति और आनंद
- 2स्वप्न में इष्ट देवता का दर्शन
- 3मंत्र का स्वतः मन में जप
- 4मनोकामना का स्वाभाविक पूर्ण होना
- 5मन में असाधारण निर्भयता
महानिर्वाण तंत्र का वचन
श्रद्धया जपतो मंत्रं न सिद्धिर्विलम्बते।
भक्त्या ध्यायन् महादेवीं क्षिप्रं सिद्धिमवाप्नुयात्।।'
— श्रद्धा से मंत्र जपने पर सिद्धि में विलंब नहीं होता। भक्तिपूर्वक महादेवी का ध्यान करने से शीघ्र सिद्धि मिलती है।
सार
सिद्धि केवल जप संख्या से नहीं — श्रद्धा, निरंतरता, शुद्ध आचरण और गुरु कृपा से मिलती है।





