विस्तृत उत्तर
फलश्रुति (स्तोत्र के अंत में दिए गए लाभ) में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि स्तोत्र का पाठ सप्तवारं पठेत् स्तोत्रम् (एक बार में सात बार) करना चाहिए।
साधक को पाठ करते समय मनसा चिन्तितम् (मन में संकल्पित चिंता या दुःख) को ध्यान में रखना चाहिए।
यदि यह साधना किसी असाध्य बीमारी या बड़े संकट के निवारण के लिए की जा रही है, तो श्रद्धापूर्वक संकल्प लेना आवश्यक है।





