विस्तृत उत्तर
फलश्रुति (श्लोक 10) में 'अखिलार्थसम्पदम्' शब्द का प्रयोग हुआ है।
अखिलार्थसम्पदम् का अर्थ है 'सम्पूर्ण धन-संपदा' या 'सभी प्रकार की समृद्धि'।
स्तोत्र का पाठ सभी प्रकार की समृद्धि (अखिलार्थसम्पदम्) प्रदान करता है, अर्थात यह भौतिक इच्छाओं (धन, संपत्ति, सफलता) और आध्यात्मिक इच्छाओं (मुक्ति) दोनों को पूर्ण करता है।





