विस्तृत उत्तर
अर्धनारीश्वर स्तोत्र एक अष्टकम् के रूप में प्रसिद्ध है, जिसमें कुल आठ श्लोक हैं, और अंत में एक फलश्रुति छंद है।
स्तोत्र की विशिष्टता यह है कि यह प्रत्येक श्लोक में शिव और शक्ति के परस्पर विरोधी स्वरूपों की स्तुति करते हुए, अंत में दोनों को एक ही रूप में प्रणाम करता है।
इसमें जानबूझकर स्त्रीलिंग (शिवायै, निरीश्वरायै) और पुल्लिंग (शिवाय, जगदेकपित्रे) पदों का समानांतर उपयोग किया गया है।





