विस्तृत उत्तर
स्तोत्र के छठे श्लोक में शिव की जटाओं का वर्णन इस प्रकार है:
जिनकी जटाएं बिजली की चमक के समान ताम्रवर्णी हैं — यह शिव के विशेष स्वरूप का वर्णन है।
इसके विपरीत, देवी के केश मेघ के समान श्याम और घने बताए गए हैं।
इस श्लोक में शिव को 'निखिलेश्वराय' (संपूर्ण जगत के एकमात्र ईश्वर) और देवी को 'निरीश्वरायै' (स्वयं परम स्वतंत्र) कहा गया है।





