विस्तृत उत्तर
स्तोत्र के पहले श्लोक में 'चाम्पेयगौर' और 'कर्पूरगौर' का प्रयोग हुआ है।
चाम्पेयगौर: जिनका आधा शरीर (देवी/शक्ति भाग) चंपा पुष्प के समान पीत-गौर वर्ण का है। यह आकर्षण और भोग का प्रतीक है।
कर्पूरगौर: जिनका आधा शरीर (शिव भाग) कपूर के समान श्वेत-गौर वर्ण का है। यह वैराग्य और त्याग का प्रतीक है।
ये विपरीत विशेषताएं एक ही स्वरूप में भोग और योग, सौंदर्य और वैराग्य के समन्वय को दर्शाती हैं।





