विस्तृत उत्तर
स्तोत्र के सातवें श्लोक में यह वर्णन है:
देवी को 'जगज्जनन्यै' (संसार की जननी/माता) कहा गया है क्योंकि शक्ति ही सृष्टि की मूल ऊर्जा है और समस्त प्राणियों की माता हैं।
शिव को 'जगदेकपित्रे' (संसार के एकमात्र पिता) कहा गया है क्योंकि शिव परम चेतना के रूप में समस्त सृष्टि के आधार और पिता हैं।
यह वर्णन शिव और शक्ति के सृष्टि में समान और अनिवार्य योगदान को दर्शाता है।





