अर्धनारीश्वर स्तोत्रस्तोत्र में देवी को जगज्जननी और शिव को जगदेकपिता क्यों कहा गया?देवी समस्त सृष्टि की जननी (माता) हैं और शिव सृष्टि के एकमात्र पिता हैं — दोनों मिलकर सृष्टि के आधार हैं, इसीलिए इन्हें जगज्जननी और जगदेकपिता कहा गया।#जगज्जननी#जगदेकपिता#माता पिता
अर्धनारीश्वर स्तोत्रस्तोत्र में लास्य और तांडव नृत्य का क्या अर्थ है?लास्य = देवी का कोमल, सृजनात्मक नृत्य (सृष्टि का प्रतीक); तांडव = शिव का उग्र, प्रलयकारी नृत्य (संहार का प्रतीक)। दोनों एक ही परम सत्ता के पहलू हैं।#लास्य नृत्य#तांडव नृत्य#सृष्टि संहार