विस्तृत उत्तर
स्तोत्र के पाँचवें श्लोक में शिव को 'दिगम्बराय' कहा गया है।
दिगम्बर का अर्थ है — जो दिशाओं को ही अपना वस्त्र मानते हैं, अर्थात जो किसी वस्त्र को धारण नहीं करते।
इसके विपरीत, देवी 'दिव्यांबरायै' हैं — जो दिव्य वस्त्र धारण करती हैं।
यह वैषम्य शिव के परम वैराग्य और देवी के सौंदर्यपूर्ण स्वभाव को एक साथ प्रस्तुत करता है।





