अर्धनारीश्वर स्तोत्रस्तोत्र में शिव को दिगम्बर क्यों कहा गया है?शिव को दिगम्बर कहा गया है क्योंकि वे दिशाओं को ही अपना वस्त्र मानते हैं — यह उनके परम वैराग्य का प्रतीक है। देवी दिव्य वस्त्र धारण करती हैं।#दिगम्बर#शिव#स्तोत्र श्लोक 5
तंत्र साधनातंत्र में वस्त्रधारी साधना और दिगम्बर साधना में क्या अंतर हैवस्त्रधारी = दक्षिणाचार: शुद्ध वस्त्र, सात्विक, शाकाहार, घर/मन्दिर, सभी हेतु। दिगम्बर = वामाचार: निर्वस्त्र, उग्र, पंचमकार, शमशान, केवल दीक्षित। लक्ष्य दोनों का एक = मोक्ष/शक्ति जागरण। दक्षिणाचार = सुरक्षित और अधिकांश हेतु उपयुक्त।
तंत्र साधनातंत्र में दिगम्बर साधना क्या होती हैदिगम्बर साधना = निर्वस्त्र साधना। दिक् + अम्बर = दिशा ही वस्त्र। अर्थ: संसार/अहंकार त्याग, मूल प्रकृति। शक्ति (काली/तारा), अघोर, वामाचार परम्परा में। अत्यन्त उन्नत/गोपनीय — गुरु दीक्षा अनिवार्य, एकान्त, सामान्य भक्तों हेतु नहीं।#दिगम्बर#साधना#तंत्र