विस्तृत उत्तर
स्तोत्र के छठे श्लोक में इन दो महत्वपूर्ण पदों का प्रयोग है:
निरीश्वरायै (शक्ति के लिए): जो स्वयं परम स्वतंत्र हैं, किसी अन्य के अधीन नहीं। शक्ति अपनी रचनात्मक ऊर्जा में पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
निखिलेश्वराय (शिव के लिए): संपूर्ण जगत के एकमात्र ईश्वर। शिव संपूर्ण चेतना के आधार हैं।
यह भाव शैव दर्शन के इस सिद्धांत को मजबूती देता है कि शिव और शक्ति का आश्रय एक-दूसरे पर है; वे पूर्ण रूप से पूरक हैं और दोनों की ही स्तुति अनिवार्य है।





